Jammu and Kashmir | Hurriyat Conference leader Syed Ali Shah Geelani passed away at the age of 91 | Gilani was a three-time MLA from Sopore Seat of Jammu and Kashmir Assembly | कश्मीर के अलगाववादी नेता गिलानी ने 91 साल की उम्र में ली आखिरी सांस, 3 बार विधायक रहे; घाटी में इंटरनेट बंद

0
21

  • Hindi News
  • National
  • Jammu And Kashmir | Hurriyat Conference Leader Syed Ali Shah Geelani Passed Away At The Age Of 91 | Gilani Was A Three time MLA From Sopore Seat Of Jammu And Kashmir Assembly

श्रीनगरएक घंटा पहले

  • कॉपी लिंक

ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी का बुधवार देर रात निधन हो गया। उन्होंने 91 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। PDP नेता महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर गिलानी के निधन की जानकारी दी। उधर, कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि गिलानी के निधन की खबर मिलने पर कश्मीर में कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं। इंटरनेट भी बंद कर दिया गया है।

मुफ्ती ने कहा- गिलानी साहब के इंतकाल की खबर से दुखी हूं। हमारे बीच ज्यादा मुद्दों पर एकराय नहीं थी, लेकिन उनकी त्वरित सोच और अपने भरोसे पर टिके रहने को लेकर उनका सम्मान करती हूं। अल्लाह उन्हें जन्नत में जगह दे। उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करती हूं।

श्रीनगर के हैदरपुरा में रात 10.35 बजे ली आखिरी सांस
सीनियर हुर्रियत नेता ने हैदरपुरा स्थित अपने घर पर बुधवार रात 10.35 बजे अंतिम सांस ली। गिलानी का परिवार उन्हें हैदरपुरा में ही सुपुर्द-ए-खाक करना चाहता है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें सोपोर में भी दफनाया जा सकता है। गिलानी के परिवार में दो बेटे और चार बेटियां हैं।

कश्मीर में अपनी एक तकरीर के दौरान सैयल अली शाह गिलानी। -फाइल फोटो।

कश्मीर में अपनी एक तकरीर के दौरान सैयल अली शाह गिलानी। -फाइल फोटो।

कश्मीर की सोपोर सीट से 3 बार विधायक रहे
गिलानी कश्मीर में सक्रिय अलगाववादी नेता थे। 29 सितंबर 1929 को सोपोर में जन्मे गिलानी को हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का उदारवादी चेहरा माना जाता था। गिलानी ने कॉलेज की पढ़ाई लाहौर से की थी। उस समय लाहौर भारत का हिस्सा था। वे कश्मीर की सोपोर विधानसभा सीट से 3 बार विधायक भी रहे थे।

1990 में हुर्रियत बनाई, अलगाववादी शामिल हुए
गिलानी कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानते थे और उसे अलग करने की मांग करते थे। उन्होंने 1990 के दशक में आतंकी हिंसा और अलगाववाद की सियासत करने वाले धड़ों को मिलाकर ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गठन किया था। इसमें 1987 के चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की खिलाफत करने वाले तमाम गुट शामिल हो गए थे।

कश्मीर में एक अलगाववादी प्रदर्शन के दौरान सैयद अली शाह गिलानी। -फाइल।

कश्मीर में एक अलगाववादी प्रदर्शन के दौरान सैयद अली शाह गिलानी। -फाइल।

टेरर फंडिंग के आरोप, देशद्रोह का केस भी दर्ज
गिलानी पर पाकिस्तान की फंडिंग के सहारे कश्मीर में अलगाववाद भड़काने के आरोप लगे। उन पर कई केस भी दर्ज हुए, जिसके बाद उनका पासपोर्ट भी रद्द कर दिया गया। NIA और ED ने टेरर फंडिंग के मामले में जांच की थी, जिसमें उनके दामाद समेत कई रिश्तेदारों से पूछताछ हुई थी।

खबरें और भी हैं…

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here