Karnal lathi charge on farmers case reached to Human Rights Commission Complaint against DGP, State Secretary, DC, SP and SDM | हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, करनाल के डीसी-एसपी और एसडीएम के खिलाफ शिकायत, हत्या का केस दर्ज करने और मुआवजा दिलाने की मांग

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हिसार5 घंटे पहले

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पुलिस के लाठीचार्ज में घायल किसान।

करनाल के बसताड़ा किसानों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज का मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र सिंह ढुल ने इस मामले को लेकर आयोग को शिकायत भेजी है। एडवोकेट रविंद्र सिंह ढुल ने हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी और करनाल के डीसी, एसपी व एसडीएम आयुष सिन्हा के खिलाफ शिकायत दी है। मानवाधिकार आयोग को भेजी गई शिकायत में ढुल ने पुलिस लाठीचार्ज के कारण जान गंवाने वाले किसानों के लिए 50-50 लाख रुपए के मुआवजे, घायलों के लिए 25-25 लाख रुपए के मुआवजे के अलावा करनाल के एसडीएम आयुष सिन्हा के खिलाफ हत्या व हत्या प्रयास का केस दर्ज करने की मांग की है। शिकायतकर्ता रविंद्र सिंह ढुल ने बताया कि करनाल में किसानों पर किए गए लाठीचार्ज के दौरान मानवाधिकारों का पूरी तरह से उलंघन किया गया है। सीआरपीसी 130 के नियमानुसार किसी भी दंगे को रोकने या भीड़ को तीतर-भीतर करने के लिए पुलिस या फोर्स हल्का बल प्रयोग कर सकती हैं। स्थिति नियंत्रित करने के लिए भीड़ के पैरों पर लाठी मारी जा सकती है। फायरिंग भी सिर्फ पैरों की तरफ हो सकती है ताकि भीड़ को डराकर भगाया जा सके लेकिन करनाल में प्रदर्शन कर रहे किसानों के सिर पर पुलिस ने लाठियां मारीं। इसके अलावा वहां तैनात एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी फोर्स को लट्‌ठ मारकर किसानों के सिर फोड़ देने का आदेश दे रहा है जो पूरी तरह से नियमों का उलंघन है।

रविंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के कारण एक किसान की मौत हुई है और कई किसानों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस कार्रवाई में घायल हुए किसानों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए वहां एंबुलेंस आदि का प्रबंध भी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि करनाल में पुलिस द्वारा की गई बर्बर कार्रवाई एनडीएमए की गाइडलाइन 2014 के अनुसार व यूनाइटेड नेशन के नियमावली के अनुसार पूरी तरह से गलत है। करनाल में जिला प्रशासन और पुलिस ने जिस तरह मानवाधिकारों का हनन किया है और जिसकी वजह से किसानों को गंभीर चोटें आई और एक किसान की जान चली गई, उसके लिए पूरी तरह से प्रशासनिक व्यवस्था जिम्मेदार है। इसलिए करनाल जिला प्रशासन के अधिकारियों और पुलिस अफसरों पर कार्रवाई करते हुए पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाया जाए।

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